Wednesday, 2 January 2019

बुलंदी पर बांग्लादेश, भारत को भी छोड़ रहा पीछे

क्या यह ऑस्ट्रेलिया की सबसे कमज़ोर फ़ील्डिंग वाली टीम है.
इसे लेकर विजय लोकपल्ली का मानना है कि यह ऑस्ट्रेलिया की अब तक की सबसे कमज़ोर फ़ील्डिंग ही नहीं सबसे कमज़ोर बल्लेबाज़ी वाली टीम भी है.
इस बात को तो भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान इयान चैपल भी कह चुके हैं. ज़ाहिर है जब उनकी बैटिंग ख़राब चल रही है तो भारत के गेंदबाज़ तो कामयाब होंगे ही.
ऑस्ट्रेलिया के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ उस्मान ख़्वाजा हों या फिर एरोन फिंच, शॉन मार्श, कप्तान टिम पेन और ट्रेविस हेड यह सभी अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में नहीं बदल पा रहे हैं.
भारतीय खेमे के लिए इस सिरीज़ में सबसे बड़ा सिरदर्द उसकी सलामी जोड़ी रही है. शुरुआती दो मैचों में के.एल. राहुल और मुरली विजय की सलामी जोड़ी बुरी तरह असफल रही.
उनकी जगह तीसरे टेस्ट में मयंक अग्रवाल के साथ हनुमा विहारी को उतारा गया जिन्होंने कुछ बेहतर शुरुआत ज़रूर दिलाई.
हालांकि, हनुमा विहारी नियमित ओपनर नहीं हैं, इसलिए ओपनिंग की समस्या अभी भी टीम के लिए बनी हुई है.
इस पर विजय लोकपल्ली मानते हैं कि पुराने समय की तरह यह समस्या उभर आई है. अगर सलामी जोड़ी अच्छी शुरुआत देती है तो फिर टेस्ट मैच पर बहुत पहले से ही पकड़ बन जाएगी.
ख़ैर जो भी हो मैच में मिली जीत तमाम उठते सवालों को समाप्त कर देती है और एक हार कई सवाल खड़े भी करती है.
सिडनी में जीत के लिए भारत पहले से ही कमर कसे हुए है. विराट कोहली किसी भी क़ीमत पर ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सिरीज़ जीतने का मौक़ा गंवाना नही चाहते.
बस देखना इतना है कि क्या ऑस्ट्रेलिया पर्थ की तरह पलटवार करने में कामयाब तो नहीं हो जाएगी. जो भी हो सारे समीकरण फिलहाल तो भारत के पक्ष में ही हैं.
इन दिनों टेस्ट मैच के ड्रॉ होने का चलन समाप्त हो चुका है. सिडनी में सारा दबाव ऑस्ट्रेलिया पर ही होगा.
भारत ने ऑस्ट्रेलिया में पहली बार साल 1947-48 में कोई टेस्ट सिरीज़ खेली थी. तब से लेकर आज तक भारत कभी भी ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सिरीज़ नहीं जीत सका.
नए साल में विराट कोहली की टीम भारत को यह तोहफ़ा दे सकती है.
1971 में पाकिस्तान से आज़ादी की लड़ाई के बाद बांग्लादेश ने कई त्रासदियों को झेला है. भयावह ग़रीबी, प्राकृतिक आपदा और अब दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी संकट से बांग्लादेश जूझ रहा है. सात लाख 50 हज़ार रोहिंग्या मुसलमान पड़ोसी म्यांमार से अपना घर-बार छोड़ बांग्लादेश में आ गए हैं.
इतना कुछ होने के बावजूद बांग्लादेश अपनी आर्थिक सफलता की नई इबारत लिख रहा है. हालांकि बांग्लादेश की इस सफलता की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस रूप में नहीं हुई.
मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर में बांग्लादेश तेज़ी से प्रगति कर रहा है. कपड़ा उद्योग में बांग्लादेश चीन के बाद दूसरे नंबर पर है. हाल के एक दशक में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था औसत 6 फ़ीसदी की वार्षिक दर से आगे बढ़ी है. साल 2018 जून महीने में यह वृद्धि दर 7.86 फ़ीसदी तक पहुंच गई थी.
1974 में भयानक अकाल के बाद 16.6 करोड़ से ज़्यादा की आबादी वाला बांग्लादेश खाद्य उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बन चुका है. 2009 से बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति आय तीन गुनी हो गई है.
इस साल प्रति व्यक्ति आय 1,750 डॉलर हो गई. बांग्लादेश में बड़ी संख्या में लोग ग़रीबी में जीवन बसर कर रहे हैं लेकिन विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन 1.25 डॉलर में अपना जीवन चलाने वाले कुल 19 फ़ीसदी लोग थे जो अब 9 फ़ीसदी ही रह गए हैं.
शेख़ हसीना लगातार तीसरी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं. हसीना के नेतृत्व में बांग्लादेश हाल के वर्षों में एशिया के सबसे सफल देशों में से एक उभरकर सामने आया है.
एक वक़्त था जब बांग्लादेश (उस वक़्त उसे पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था) पाकिस्तान का सबसे ग़रीब इलाक़ा था. 1971 में आज़ादी के बाद भी बांग्लादेश भीषण ग़रीबी में रहा. 2006 के बाद से बांग्लादेश की तस्वीर से धूल छंटने लगी और तरक़्क़ी की रेस में पाकिस्तान से आगे निकल गया.
'विकास दर में बांग्लादेश भारत को पीछे छोड़ देगा'
बांग्लादेश की वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर पाकिस्तान से 2.5 फ़ीसदी आगे निकल गई. जाने-माने अर्थशास्त्री कौशिक बासु का कहना है कि बांग्लादेश विकास दर में भारत को भी पीछे छोड़ देगा.
बांग्लादेश की आबादी 1.1 फ़ीसदी दर से प्रति वर्ष बढ़ रही है जबकि पाकिस्तान की दो फ़ीसदी की दर से बढ़ रही है. इसका मतलब यह भी है कि पाकिस्तान की तुलना में बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति आय भी तेज़ी से बढ़ रही है.
कहा जा रहा है कि बांग्लादेश बड़े शांत तरीक़े से अपना कायापलट कर रहा है. कौशिक बसु का मानना है कि बांग्लादेश के समाज के बड़े हिस्से में बदलाव की बयार है और यहां महिलाओं का सशक्तीकरण भी तेज़ी से हो रहा है. बांग्लादेश में एक व्यक्ति की औसत उम्र 72 साल हो गई है जो कि भारत के 68 साल और पाकिस्तान के 66 साल से ज़्यादा है.
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2017 में बांग्लादेश में जिन लोगों का बैंक खाता है उनमें से 34.1 फ़ीसदी लोगों ने डिजीटल लेन-देन किया जो दक्षिण एशिया में औसत 27.8 फ़ीसदी ही है.

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