ह गांव जाट बहुल है. बाक़ी जातियां भी हैं, लेकिन वर्चस्व जाटों का ही
है. प्रधान राजकुमार का कहना है कि इस गांव में साढ़े तीन हज़ार वोटर हैं
और इसमें मुस्लिम साढ़े तीन सौ के आसपास हैं. गांव के मुसलमान इस वाक़ये पर
कुछ बोलना नहीं चाहते हैं.
रात के नौ बज रहे थे और मस्जिद में 10 से 12 लोग बैठे हैं. उनसे इस धर्मांतरण के बारे में पूछा तो मोहम्मद इरफ़ान
ने कहा, ''सब ठीक है जी. सब ठीक है. आप चाय लेंगे या कुछ और. ठंडा
मंगाऊं?''
फिर पूछा कि ये सब कैसे हुआ और क्या कारण है. उनका फिर
वही जवाब था, ''सब ठीक है. हमलोग बिल्कुल ठीक हैं.'' उन्होंने आख़िर में
कहा, ''ख़ुदा के लिए अब कुछ मत पूछिए.''
यहां ख़ामोशी है, लेकिन
गांव के प्रधान राजकुमार कहते हैं कि मुसलमान से कोई हिन्दू बनता है तो
अच्छा ही लगता है जी. राजकुमार का अच्छा लगना इस परिवार के लिए कितना अच्छा होगा शायद यह सवाल पूरे परिवार को परेशान कर रहा है.
अख़्तर अली का परिवार पहले बागपत शहर के पास खूबीपुर निवाडा गांव में
रहता था. इसी गांव ये एक साल रहे. इसी साल जुलाई महीने में इनके बेटे गुलशन का शव संदिग्ध हालत में लटका हुआ मिला था. बागपत के एसपी शैलेश पांडे कहते
हैं कि इस परिवार ने पुलिस को सूचित किए बिना ख़ुद ही शव को उतारा और
नहलाकर दफ़नाने चल दिया.
शैलेश कहते हैं, ''गांव से ही पुलिस को
फ़ोन आया कि गुलशन नाम के व्यक्ति का शव मिला है और घर वाले दफ़नाने ले जा
रहे हैं. पुलिस की गाड़ी वहां पहुंची तो क़ब्रिस्तान के रास्ते से शव को
पोस्टमॉर्टम के लिए लाया गया. ये इस मामले में ख़ुद ही संदिग्ध हैं.
इन्होंने पुलिस को बिना बुलाए शव क्यों उतारा? ये दफ़नाने में इतनी
जल्दबाजी क्यों कर रहे थे? इन्होंने जो एफ़आईआर लिखवाई है उसमें भी यही कहा
है कि उनके बेटे का शव लटका हुआ मिला.''
शैलेश का कहना है कि इसकी जांच चल रही है और जल्द ही सब कुछ साफ़ हो जाएगा.
अख़्तर अली जो अब धरम सिंह बन गए हैं, उनका कहना है कि 22 साल के गुलशन
की हत्या की गई है और पुलिस इसकी जांच करने में कोताही बरत रही है. यही बात
नौशाद कहते हैं. वो कहते हैं इस मुश्किल वक़्त में उनके कौम के लोगों ने
भी साथ नहीं दिया, इसलिए हिन्दू धर्म अपनाने का फ़ैसला किया.
खूबीपुर निवाडा के लोगों का कहना है कि गुलशन ने ख़ुदकुशी की थी क्योंकि उसकी
पत्नी को घर वाले एक साल से आने नहीं दे रहे थे. मुश्किल वक़्त में कौम के
साथ नहीं देने के आरोप पर गांव वालों का कहना है कि अगर ऐसा होता तो
क़ब्रिस्तान में शव को दफ़नाने ही नहीं दिया जाता.
क्या हिन्दू बनने
से पुलिस इस जांच में अख़्तर अली के मन मुताबिक़ काम करेगी? शैलेश पांडे कहते हैं, ''पुलिस धर्म के आधार पर काम नहीं करती है. जांच हम तथ्यों के
आधार पर करते हैं. अगर कोई ऐसा सोच रहा है तो बिल्कुल ग़लत है कि धर्म बदलने के कारण उसे मदद मिलेगी. इसी परिवार का नौशाद एसडीएम के पास एक
शपथपत्र लेकर आया था कि वो हिन्दू धर्म से बहुत प्रभावित है और इसलिए
स्वेछा वो हिन्दू बनने जा रहा है. धर्म बदलने का कोई सरकारी तरीक़ा नहीं
है. आपको हिन्दू बनकर रहना है या मुसलमान, इससे प्रशासन को कोई लेना देना नहीं है.''
युवा हिन्दू वाहिनी का कहना है कि इनके पूर्वज जोगी जाति के थे इसलिए
इन्हें जोगी जाति ही मिलेगी. अख़्तर अली के परिवार का भी कहना है कि वो
फेरीवाले का काम करते हैं इसलिए ये जाति उनके पेशे से हिसाब से ठीक है.
हालांकि शैलेश पांडे कहते हैं कि कोई ख़ुद से अपनी जाति नहीं चुन सकता है
और अगर चुन भी लेता है तो उसे उस आधार पर सरकारी योजनाओं का फ़ायदा नहीं
मिलेगा.
सूर्यास्त हो चुका है. बदरखा गांव अंधेरे में समा रहा है.
अख़्तर अली के आंगन में भी रात दस्तक दे चुकी है. पर ये रात अब अख़्तर अली
के आंगन में नहीं बल्कि धरम सिंह के आंगन में है. रुकै़या आटा गूंथ रही
हैं. कल तक नौशाद के लिए रोटी बनाती थीं आज वो नरेंद्र के लिए रोटी
बनाएंगी. रुक़ैया कहती हैं, ''क्या फ़र्क़ पड़ता है जी. हमें तो वही करना है जो रोज़ करती हूं. हिन्दू रहूं या मुसलमान.''
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